शनिवार, 12 अप्रैल 2008

दो टकियाँ दी नौकरीः कार्पोरेट कल्चर



दो टकियाँ दी नौकरीः कार्पोरेट कल्चर

अंगरेजी में एक कहावत हैं "The only problem with rat race is that,even if you win it,you will remain a rat only" मतलब चूहा दौड में समस्या हैं,कि जीतने के बाद भी आप चूहें ही रहते हैं। भूमण्डलीयकरण के उत्पादो में विदेशी पूँजी निवेश और बहुराष्टीय कंपनीयों की ढेर सी नौकरीयाँ स्वागत योग्य है,किंतु कर्मचारियो का शोषण भी बढा हैं। इसके अंतर्गत कार्य का अतिरक्त बोझ,कार्य के घंटे तय न होना,लेबर लाँ के प्रतिकूल , प्राकृतिक न्याय के नियम का पालन किए बिना स्थानांतरण,सेवा समाप्ति,मानसिक प्रतारणा भी सहज प्राप्त है।
जहाँ तक समाज का प्रश्न है,अभी वह लुभावनी तनख्वाह,cost to company,package कें मोहपाश से बाहर आकर सोचने की स्थिति मे नहीं है। पुनःस्थापन हेतु placement agencies उपलब्ध है जो उसी संस्कार के संस्थान मे पुनः कर्मचारियो को झोंक कर समस्या का अस्थाई समाधान प्रदान कर देते है। ८ घंटे काम,८घंटे आराम,८ घंटे पारिवारिक,सामाजिक,रचनात्मक जीवन से न सिर्फ कर्मचारियो का मानसिक अपितु समाजिक संतुलन भी बनता है,किंतु यह बीते समय की बात हुई। इस चूहा दौड ने रचनात्मकता तो दूर कानून (law of land) का भी अतिक्रमण कर लिया है।
कुछ स्थानों पर तो स्थिति हास्यासपद हो चुकी है,जैसे एक कंपनी का आफिस ही ३स्टार होटल है,परिवार के लिए प्रथक दिवस निर्धारित है,उस दिन कंपनी की ए.सी. बस उनके परिवारो को लाकर कर्मचारियो से मिलवा देती हैं।एसा नही हैं कि,कानून में कहीं कमीं है,किंतु संगठित कंपनियों के असंगठित कर्मचारी माँग कैसे सकते है? ट्रेड यूनियन की बात,चूहा दौड में संभव नहीं । इसे पीछे रह जाना माना जाता है। यह बात आकाओं को भी पसंद नहीं। तब अफसरशाही और लालफीताशाही में डूबे कार्पोरेट जगत में यह बात अपराध तुल्य नहीं अपराध ही है।
तो बस अपनी कीमत बोलिए और बन जाईए संभ्रांत बंधुआ मजदूर।

2 टिप्‍पणियां:

समय चक्र ने कहा…

मैं आपके विचारो से सहमत हूँ धन्यवाद
मेरे ब्लॉग आपके आगमन की प्रतीक्षा मे
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गुलुश ने कहा…

यह बिलकुल सच है कि कार्पोरेट कंपनियों में अधिक शोषण की बात देखने को मिलती है। लोग ज्यादा वेतन के लालच में पिसते रहते हैं और उफ नहीं करते हैं। कंपनियों की इस कार्यप्रणाली से कमिंयों पर विपरीत शारीरिक और मानसिक प्रभाव की खबरें तो अब समाचार पत्रों में आए दिन पढ़ने को मिलती हैं।