
धर्मराज जयसवालःस्मरण ऍव नाट्यान्जली
जबलपुर के दिवंगत,वरिष्ठतम रंगकर्मी धर्मराज जयसवाल जी को विवेचना रंगमन्डल ऍंव ऍंकता कला मन्च के संयुक्त प्रयास से आज चन्चलाबाई महा.के प्रान्गण मे ऍक नाट्यान्जली के माध्यम से याद किया गया।
कार्यक्रम के प्रथम चरण मे जबलपुर के विधानपुरुष ईश्वरदास जी रोहाणी ने माल्यार्पण कर धर्मराज जयसवाल जी को श्रध्दांजली अर्पित कर कहा कि हम कलाकार के हाड मांस के शरीर को न
यादही करते अपितु उसकी कला को करते है। संस्कारधानी की हास्य त्रिवेणी॑ के.के.नायकर,दत्रातेय कुलकर्णी,रजनीकांत त्रिवेदी ने अपने संस्मरण सुनाऐ ऍव श्री जयसवाल के योगदान को रेखांकितकिया।कार्यक्रम के दूसरे चरण मे नाट्यांजली "अमंचित प्रस्तुति" नाटक प्रस्तुत हुआ।नाटक का निर्देशन श्री अरुण पाण्डे जी ने किया था।नाटक वैसे तो ऍक पात्र द्वारा कथा वाचन के रुप मे था किंतु द्रश्य बंधो मे अन्य पात्रो के प्रयोग से कथा सम्प्रेषण प्रभावी बन पडा। नाटक मे ऍक अमंचित नाटक की कथा को मुख्य पात्र ही बताता है,जिसमे ऍक अनाम चित्रकार को पैसे देकर,ऍक ख्यातिलब्ध चित्रकार उसकी क्रति से पुरुस्कार प्राप्त कर लेता है। मुख्य पात्र के रुप मे सूरज राय जी ने अपने वाचिक अभिनय से दर्शको को बांधे रखा।अन्य भूमिकाओ मे संतोष,नवीन चौबे,विनय अम्बर आदि रहे। निर्देशन कसावटपूर्ण ऍव प्रयोगधर्मी था। अंत मे यह गरिमापूर्ण आयोजन नाटक के साथ समाप्त हुआ।
आशीष पाठक
समागम रंगमंडल,जबलपुर
1 टिप्पणी:
स्वागत है हिन्दी चिट्ठाजगत में. अच्छी रिपोर्ट प्रस्तुत की. बधाई. अनेकों शुभकामनायें नियमित लेखन के लिये.
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