मंगलवार, 12 अगस्त 2008

जिंदगी ड्रांइग रुम में...





जिंदगी ड्रांइग रुम में...



बन जाओ एक फोटो फ्रेम,
लग जाओ किसी ड्रांइग रुम में,
बदलते चेहरे,
बदलते दृश्य,
समेटो किसी को अपनें अंदर,
निकाल फेंको अगले ही पल,
दूसरा फिर कोई फ्रेम में,
जिंदगी ड्राइंग रुम में,
चलती किसी फ्रेम में।।

5 टिप्‍पणियां:

Udan Tashtari ने कहा…

बढ़िया गहरी बात!!!

Unknown ने कहा…

बढ़िया !

Dr. Zakir Ali Rajnish ने कहा…

बहुत खूब। आसान लफजों में आपने बहुत गम्‍भीर बात कह दी है।

Sumit Pratap Singh ने कहा…

सादर ब्लॉगस्ते!

कृपया निमंत्रण स्वीकारें व अपुन के ब्लॉग सुमित के तडके (गद्य) पर पधारें। "एक पत्र आतंकवादियों के नाम" आपकी अमूल्य टिप्पणी हेतु प्रतीक्षारत है।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

क्या बात है
मज़ा आ गया पड़ कर, सीधे शब्दों में गहरी बात