
डिनर पालीटिक्स
सभी सादर आमत्रित है,
जो सांसद है,
जिनके मुहँ घोडे से है।
सभी दल आ जाए,
रात्री भोज में,
भले संख्या में थोडे से है।
प्रार्थना करके आए,
हे! प्रभु हर बार रखना लाज,
कैसे भी हो हालात,
सांसद जरूर बनाना प्रभु,
कोई सकंट ना आए,
किंतु! सरकार पर अवश्य आ जाए,
उसी समय देना मुहँ घोडे सा,
और देना आमंत्रण डिनर का प्रभु।
लोकतन्त्र का हाथी चलाना है,
सबको डिनर पर आना है।
जो सांसद बीमार है,वर्षो से
उन पर जादू हो जाएगा,
चमत्कारी ढंग से खडे हो जाएगें,
एअर एम्बूलेन्स आएगी,
गोद में बिठा कर ले जाएगी।
ईतावली सूप मँगवाया है,
पहले भूख बढा लेना,
फिर "प्राइस टेग" लगा लेना।
तुम पर जब रथ बाँधा गया था,
अर्जुन ,गाण्डीव लिए हाँफ रहा था,
कृष्ण तुमको हाँक रहा था।
तुम्हारी स्मृतियो में भरी है,
बात याद करो,
सब रिश्ते झूठे, आगे बढो।
अरे नादान!
घूरे के भी दिन फिरते है,
पहले रथ में बँधते थे,
अब करोडो में बिकते है।
रिश्तो,नातो,विचारो से पीठ करो,
लोकतंत्र का हाथी लोगो पर ही "शिट" करे,
अमेरिका अपना पपलू "फिट" करें,
तुम ना घबराना पार्थ वाहक!
डेमोक्रेटिक मोनार्की में ,
कम्यूनिस्ट केपिटल्सम मिला लेना,
जाते ही, चार पेग काकटेल चढा लेना।
फिर देखना हाथी चलता नजर आएगा,
घोडे खुशी से झूम उठेंगें,
लोकतंत्र बच गया,
डिनर हो गया,
हाथी चल गया,
हाथी चल गया।
8 टिप्पणियां:
सही लिखा है।
bahut sundar abhivyakti ke liye badhaai .
बहुत अच्छा ।
लेकिन इन हाथी , घोडों को शर्म कब आयेगी ।
सही है महाराज!!
bahut khoob. in ghodo ko goli maar do
kya kehne dost!
achcha likh mara hai
SUNDAR KALPANA GURU AISE HI GHUMA GHUMA KE DIYA KARO IN POLITICIANS KO BADHAI
wah je sundar saty likhaa any blogs pe bhee aana kiyaa karie
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