रविवार, 25 मई 2008

"सबसे उदास कविता"





"सबसे उदास कविता"
एक दिन हम दोनो बैठे बोर हो रहे थे,
मैने उससे कहा- "चलो खेले एक खेल"
उसने कहा "ठीक है,कैसा खेल?"
मैने कहा बस हम बैठेंगे दूर दूर,
मै बैठूँगा इधर,
तुम बैठना उधर,
एक चाँक होगी मेरे पास,
एक चाँक होगी तुम्हारे पास,
अपने सामने हम बिछाएंगे,
हम बिछएंगे अपने रिश्तो की रेखाएँ,
चाक से अपने रिश्तो की रेखाएँ आगे बाढाएंगें,
आगे बढा कर इन्हे कुछ क्रिएटिव बनाएंगे,
पहले आएगी मेरी बारी,
फिर आएगी तुम्हारी बारी,
उसने कहा ठीक है।
मैने चाक से एक रिश्ते की रेखा को लम्बा खींचा,
उसने सामने फैले रिश्तो को गौर देखा,
और कहा -"पास"!
मैने चाक से दूसरे रिश्ते की रेखा आगे बढाई,
जो जाकर पहले रिश्ते की रेखा से टकराई,
वो पलटी मुझे देखकर मुस्कुराई,
और कहा "पास"!
मैने देखा रेखाए बढ रही है,अपने आप,
उलझ रही है,अपने आप,
बन रहा है एक जाल,
रिश्तो का एक जाल,
उसने फिर कहा "पास"!
मै धँसता जा रहा था उस जाल में,
उसने फिर कहा "पास"!
मै सम्पूर्ण धँस चुका था जाल में,
उसने फिर कहा "पास"!
मैने धँसते हुए मौन तौडा,
कहा"मुझे बचाओ",
उसने देखा गौर से,
मुझे,
फैलते जाल को,
कुछ और सोचकर उसने कहा "पास"!
वो उढ कर चली गई,
मै जाल मे फँसा उसे जाते हुए देखता रहा,
उसके हाथ में अभी भी फँसी थी एक चाक,
बिना घुली एक पूरी चाक,
खेल खत्म हुआ इस तरह,
वो भी हारी इस तरह,
मै भी हारा इस तरह,
खेल खत्म हूआ इस तरह,
कुछ क्रिएटिव भी बन गया इस तरह,
खेल खत्म हुआ इस तरह।

19 टिप्‍पणियां:

"ρσωєя σƒ тяυтн ιѕ ωιтнιη мє..!" ने कहा…

sabse udaas kavita bhi kisi ki aankho ko chamak deti hai.....
na mai haari hu..., na haara hai wo..!!ye to zindagi haari hai jo sabke imthaan leti hai....!!!!!

samagam rangmandal ने कहा…

धन्यवाद!
वक्त से पहले मै भला क्यो हार मानू,
मै अभी हारा नहीं,ये जग मुझसे जीता नहीं।

पर हाँ दर्द तो है।

Udan Tashtari ने कहा…

वो भी हारी इस तरह,
मै भी हारा इस तरह,

-बहुत ही उम्दा, बधाई.

ghughutibasuti ने कहा…

कविता अच्छी लगी, उदास तो बिल्कुल नहीं। खेल जारी रखिए।
घुघूती बासूती

pallavi trivedi ने कहा…

achchi lagi ye udaas kavita...rishte sachmujh ujjhte chale jate hain kabhi kabhi...

बालकिशन ने कहा…

सुंदर! अति सुंदर!
सुंदर कविता.

बालकिशन ने कहा…

सुंदर! अति सुंदर!
सुंदर कविता.

musafir ने कहा…

bahut badhiya,lage raho.

umeed karta hoon agli baar kuch aur naya milega

समय चक्र ने कहा…

Bahut badhiya abhivyakti . dhanyawaad

Doobe ji ने कहा…

doobeyji doob gaye ji

Doobe ji ने कहा…

doobeyji doob gaye ji

बेनामी ने कहा…

behatreen

Unknown ने कहा…

Bahut achhi kavita thi , kavita me udasi bilkul nahi thi

L.Goswami ने कहा…

sundar kavita..aaj pahali bar aapke blog par aayi hun.aap bahut achchha likhten hain .likhte rahen

samagam rangmandal ने कहा…

आप सभी की प्रेरणा और टीप हेतु धन्यवाद!

samagam rangmandal ने कहा…

आप सभी की प्रेरणा और टीप हेतु धन्यवाद!

samagam rangmandal ने कहा…

आप सभी की प्रेरणा और टीप हेतु धन्यवाद!

समय चक्र ने कहा…

बहुत सुंदर अभिव्यक्ति धन्यवाद.

"ρσωєя σƒ тяυтн ιѕ ωιтнιη мє..!" ने कहा…

kaho ki udaas kyu ho tum....
mehfil mai to sama bandhte ho...
aaj hamare samne be-baat kyu ho tum...?
kafi samay se aapne kuch likha nhi...
likhte rahe....acha likhte hai...